फ़िर किसी

फ़िर किसी की ज़ुल्फो में उलझा नहीं हूँ,
फ़िर किसी की हुस्न पर खोया नहीं हूँ,
किसी की तसब्बुर में उठी नहीं है आँखे मेरी
फ़िर किसी की मुस्कुराहट पर बहका नही हूँ ।

©Manthan Prateek

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