ज़िन्दगी और कश्मकश

सुबह के 5 बजने वाले हैं
चिड़ियों की चहचाहट सुनायीं दे रही हैं,
ये हल्की हल्की रोशनी
क्या नजारा हैं!अद्धभुत,
सारा शहर अब जागने को हैं
औऱ मैं
अब सोने की तैयारी में

औऱ हा मैं किसी हुस्न की वज़ह से अब तक नही जागा हूँ
मैं जागा हूँ अपने सपनों के लिए
जब पूरा शहर सो रहा था न
तब मैं उन्हें पूरा करने में मसगुल था
अपने वक़्त को निवेश कर रहा था
कहते हैं न
Time is the most valuable investment.
तो बस कर रहा हूँ मैं भी निवेश
अपने सपनो के लिए
जब भविष्य में ये नज़ारा देखूं तो
पूरे शहर के साथ मैं भी उठ कर देखूं
तब तक शायद मेरे सपनें पूरे हो
ये शहर मेरा हो
वो वक़्त मेरा हो
शायद वो दौर मेरा हो।

©Manthan Prateek

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