हवस

ज़िस्म की भूख है
हवस का बुखार हुआ हैं,

रूह की बात कर यहां
ईमान का व्यापार हुआ है,

तुम पर्दे, शर्म और हया की बातें करते हो
अजी छोड़ो मियां…

इश्क़ के नाम पर
जिस्मफरोशी सरे बाजार हुआ हैं

©Manthan Prateek

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