हम सब एक समान हैं।

जब हर इंसान का लहू लाल है,

फिर क्यों जात, पात, धर्म का सवाल है?

नफ़रते मिट जाए अमन चैन की फ़िज़ा चले

या ख़ुदा कभी न किसी बेगुनाह को सज़ा मिले।

क्यों फिरको में बंटा हैं इंसान,

ख़ुदा के लिए तो सभी हैं एक समान ।

-ख़ाँन अतिया रफ़ी

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