हमरी अटरिया पे- दास्ताँ

तुम आये हमरी अटरिया पे, हमे बहुत खुशी हुई , हम खुश हुए की हमारा पिया वापस आया, हमे अपनी बाहों में भरने हमारा साजन आया ।
हम तो अपने सपनों को पूरा होते देखने लगे थे, सोचने लगे थे कि हमारा बलम हमसे अब बातें करेगा हमारी बातों को सुनेगा, हमारे कलेजे में जो आग भारी है उसको शांत करेगा, और हम आतुर थे तोहरी झलक देखने को, पिया के दीदार करने को हम बहुत चहक रहे थे अपने पिया की आवाज़ सुनने को और उनकी उंगलियों को अपने हाथों पर रखने को । हमारी बोली में वो झंकार थी जिसे हम कैसे बताएं, हम तो अपने पिया के प्रेम में यूं खो से गये थे कि हम संसार को भूल गए थे।
हमारे हाथों के में मधु बेकरार थी और उसकी खुशबू हमारे ग़रीबखाने को महका रही थी, जितनी तेज़ी से घड़ी की सुई आवाज़ कर रही थी हमारी धड़कनें और तेज़ होती जा रही थी ।
क्या बताएं कि क्या हाल थे हमारे, हम तो पूरे थे तुम्हारे, अब बेचैन कलेजे को तुम्हारा इंतेज़ार था, क्या बताएं क्या हमारा हाल था । तुम आये हमारी चौखट पे, तुम्हरी मुस्कुराहट को हम पढ़ चुके थे, एक दर्द हमारे लिए ला रहे हो, तुम हमसे दूर जा रहे हो । हम तुम्हारी चालाकी भाप चुके थे, बस तुमसे सुनने को रुके थे । जब तुमने अपनी ज़ुबान खोली, और अपने दिल की बात बोली, हम मुस्कुरा रहे थे, अपने ग़म को छिपा रहे थे, क्या सजा तुमको दे, कैसे तुमसे दूर रहे ।
हमारी मुस्कुराहट पे तुम भी मुस्कुरा दिए, हम भी खुद को संभाल लिए, जाओ जिसके हो उसके बनकर रहना, उसको कभी दर्द न देना । हमे तुम अब नज़र मत आना, हमारी अटरिया पर लौट कर न आना

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