सुबह का होना तय हैं।

रात कितनी भी लम्बी हो सुबह का होना तय है।

फ़िर तुम्हें अपने दुखों, तकलीफो  से क्यूँ भय है?

बिन बारिश के इंद्र धनुष कहाँ दिखाई देता है कुंदन बनने के लिए सोना हज़ार चोट और ताप सहता है।

खाँन अतिया रफ़ी

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