रोज़ थोड़ा प्रयास कर।

न  ज़्यादा तू कुछ खास कर,

बस रोज़ थोड़ा प्रयास कर।

सफ़लता अभी लगती ज़रा दूर हैं

पर परिश्रम से मिलती ज़रूर है।

अपने कार्यो को न कल पर टाला कर

हर रोज़ आज को कल से बेहतर सँवारा कर।

व्यर्थ रहकर न सुनहरे पलो की करो हत्या

न आता है समय लौट कर ये भी है सत्य।

सोना तप तप कर ही कुंदन बनता है,

बिना मेहनत के कोई कहाँ सफ़लता का स्वाद चखता है।

न ज़्यादा तू कुछ खास कर,

बस रोज़ थोड़ा प्रयास कर।

-खाँन अतिया रफ़ी

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