मैं ऐसी नहीं थी

मैं ऐसी नहीं थी जैसी तुमने मुझे बना दिया,
मेरे इतना तुम्हें चाहने पर भी आज देखो
तुमने मुझे बस आंसूओं का ही इनाम दिया।
एक दिन तुम्हारा सब कुछ तुम्हें सौंप कर उड़ जाऊंगी,
फिर ना कहना की तुम्हारी मोहब्बत को भी मैंने ही बदनाम किया।
मैं ऐसी नहीं थी जैसी तुमने मुझे बना दिया,
बात बात पर मायूस होकर मैंने खुद को ही कितना नुकसान किया।
चिड़ियों सी चहकने वाली मैं,पूरे घर में अब सन्नाटा है,
तुम ने मेरी चहचहाहट को ही गुमनाम कर दिया।
मैं ऐसी नहीं थी जैसी तुमने मुझे बना दिया,
गुमसुम रहना मेरी फितरत नहीं थी,
मैं तो हर चहरे को खिला देती थी अपनी बातों से,
अब तो इन अंधेरों ने भी दोस्ती का हाथ बढा दिया।
मैं ऐसी नहीं थी जैसी तुमने मुझे बना दिया,
मैं ऐसी हरगिज़ नहीं थी जैसी तुमने मुझे बना दिया।
अब हर किसी की बात पर सिर्फ गुस्सा आता है,
किसी से बातें करने को दिल नहीं चाहता‌ है,
हर रात मेरा मन बेहद ही अशांत पाता है,
दिल के हर कोने में बस गम है भर गया,
मैं ऐसी नहीं थी जैसी तुमने मुझे बना दिया।
अभी सूखने लगी थी मेरी आंखें पर,
तुमने याद आकर फिर से इन्हें भीगा दिया,
मैं ऐसी नहीं थी जैसी तुमने मुझे बना दिया।

-प्रियंका सिरसवाल

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