मेरी खामोशी

 

 

 

मेरी खामोशी से उसको फर्क क्या पड़ेगा

मेरे होने या न होने से उस फर्क का पड़ेगा

सब कुछ भुला के उसके पीछे जाना

और उसका ये कहना

तुम हो कौन

बड़ी चुभी थी ये बात मुझे

खैर छोड़ो

मेरी मौजूदगी से उसे फर्क क्या पड़ेगा

सुलझते रिश्ते भी उलझ गए

वो पल बड़े याद आते हैं

जिस पल मे तुम मेरे साथ थे

एक आदत बन गए थे

जो अब आसानी से छूटती नही

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