भार लेते आना

अब आना तो जरा बहार लेते आना,
चुटकी भर ही सही मगर प्यार लेते आना,
ज़रा इज़हार-ए-इश्क मेरी खातिर,
ज़रा मोहब्बत के लिये अपने ऐतबार लेते आना |

आना तो उन बातों को याद करते आना,
आना तो हसीं रातों को संग रखते आना,
जो घटी थी तुम्हारे हमारे बीच
उस तकरार को दरकिनार करते आना |

आना तो एक मुलाक़ात लिखते आना,
आना तो एक ख़त हमारे नाम लिखते आना,
जो ना मिली हो तुम्हे ना मुझे हुई नसीब,
जरा एक दिलकश शाम हमारी मोहब्बत के नाम लिखते आना|

अब जब आना तो हमे बताकर आना,
अपने जज्बात जरा दबाकर आना,
धीरे से हमारे दिल की खातिर,
चुटकी भर ही सही मगर प्यार लेते आना |

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