पिया अलबेला

कुछ नटखट, कुछ चंचल,
उसकी हर एक बात में हलचल,
उसके अंदर मौजों का रेला,
हसीन मोरा पिया अलबेला।

कटती नही ये अड़ियल रैना,
राहे तकते मेरे नैना,
अब बन्द करो जुदाई का खेला,
अब आ जाओ मोरा पिया अलबेला।

तेरी संगिनी, तेरी दासी,
मैं तो तेरे दीदार की प्यासी,
तेरी नज़रें मेरी हाला,
रसमयी मोरा पिया अलबेला।

अब तो मुझसे कहती मदिरा,
कौन करेगा रसपान मेरा,
कौन पियेगा मधु की प्याला,
कहाँ गया तोरा पिया अलबेला।

एक झलक, एक झांकी,
अभी रह गयी है बाकी,
अधूरी है ये गाधूलि बेला,
रंगीला मोरा पिया अलबेला।

मैं तो हो गयी बेचारी,
सजन तेरे प्यार में हारी,
तू मुझको छोड़ गया अकेला,
अब नही आएगा मोरा पिया अलबेला।

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