नायरा

महफिलों से गुलजार थे दिन कभी
अब सूनी सूनी सी शाम लगती है
बहुत चहल पहल थी जिंदगी में कभी,
अब ये सड़क भी बहुत आम लगती है

आँसू आँखों में आने से पहले सूख रहे
सूखे पत्ते फिर से शाख से झड़ रहे
नायरा सी है जिंदगी, तकलीफें बढ़ रही
कुछ अरमान दिल के अब दफन हो रहे।

आगे की कहानी बस बेचैनी बढ़ा रही है
दूरियाँ अब दरमियाँ, बढ़ती जा रही है
कुछ ख्वाब अधूरे ही रहते हैं अक्सर
जिंदगी आगे बढ़ने से कतरा रही है

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