दिल की सूनी जगह

 

दिल की सूनी जगह को कभी भी रूहानी होने ना दो,
ये राह इश्क की ले जायेगी, उस राह इसे जाने ना दो,
चमन में बहारे हर बार आती हैं, इसे राह भटकने ना दो,
खुशबुओं के सागर से प्रसून बहके, इन्हें बहकने ना दो।

सदाबहार तरानों की बहारों में, खोता जा रहा दिल अब,
सूनी सूनी राहों में अनजानी सी नजरें मचल रही हैं कब,
मिल जाये कोई पथिक राह में, मंजिल होगी फिर सुलभ,
पूरब से चलती हवाओं में रस घोल रही चिड़िया अब,
कुछ अधूरी सी राहों का मंजर अभी बाकी है
सूनी सी राहों का देखो सबब अभी बाकी है।
मिलन होगा फिर से कहीं, फिर से राह बदलेगी।
दिल की सूनी सी जगह है, कभी न कभी तो यह भरेगी।

Krishan Kant Sen
@krishankant.sen.Jr

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