तुम

तुम

इन बारिशों की तरह तुम भी अपने से लगते हो,
ये साथ भिगोती हैं और तुम साथ में रो देते हो।
इन हवाओं से तुम थोडा खफा से लगते हो,
ये जब भी मेरा आंचल उड़ाती है तुम झट से लपक लेते हो।
इन्द्रधनुष जैसे सात रंगों सा प्यार है तुम्हारा,
कभी सूर्य के तेज की तरह लड़ते झगड़ते खामखां मुझ पर बिगड़ते हो,
तो कभी हो कर मुझपे मेहरबान दिन भर प्यार करते हो।
और रूठ कर जब मुंह फेर लूं जो मैं तुमसे,
तो करके नटखट नादानियां मुझे खूब हंसाते हो।
हां तुम जब मुस्कुराते हो तब सबसे हसीन लगते हो,
हां तुम जब मुझे अपना बताते हो तब बेहतरीन लगते हो।
तुम एक खुबसूरत सी कोई राह लगते हो,
कभी ना मिटने वाली मेरी चाह‌ लगते हो।
सुनो! तुम जब हक जताते हो,
मुझे हक से कुछ मना कर जाते हो,
मैं छेडूं तुम्हें बार बार इंकार करूं जब,
तुम बच्चों की‌ तरह शिकायतें लेकर बैठ जाते हो।

-प्रियंका सिरसवाल

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