तुम और मैं

आओ ज़रा करीब बैठो मेरे,
बहुत दिनों से तुम्हे हमने देखा नही है,
न तुमसे बातें करी है न बाल सवारे हैं,
न तुम्हारे साथ हँस पाया हूँ,
न गले लग के रो पाया हूँ,
न मैं वो रात हसीन बना पाया हूँ,
न मै वो सुबह की तरह चहक पाया हूँ,
है कहने को बहुत कुछ पर शब्द नही है,
मै बदल गया था थोड़ा पर तुम्हारी अदाएं वही है,
ज़रा उस चांद को देखो,
देखो वो कैसे सूरज की रोशनी से चमक रहा है,
मै भी वैसे ही चमकता हूँ मुस्कान से तुम्हारी,
मै शब्द हूँ, तुम अलंकार हो,
मै राग हूँ, तुम रागिनी हो,
मै जितना खुद से उतना तुमसे भी,
मै जितना मै हूँ, उतनी तुम भी,
मै तुमसे हूँ, तुम मुझसे हो।

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