ग़ज़ल – वाह करो

करो किसी से मुहब्बत तो बे-पनाह करो
वगरना तुम न मिरे दोस्त ये गुनाह करो

बदल गया है तरीका-ए-इश्क़ अब यारों
कि जिसको भूल सको तुम उसी की चाह करो

ग़ज़ल का क़ायदा है मेरे दोस्तों सुन लो
समझ मे आये नहीं तो भी वाह वाह करो

हमारी आबरू पे अब सवाल आया है
ख़ुदा के वास्ते अब कुछ तो बादशाह करो

मैं चाहता हूँ कि थोड़ी खुशी मिले उसको
मैं चाहता हूँ मेरी जिंदगी तबाह करो

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