कश्मीर- एक सोच

सोचता हूं कश्मीर पर कुछ लिखूं, लेकिन परेशान हूं कि क्या लिखूं, कैसे उसे लफ़्ज़ों में बाँधूं जो खुद दर्द और ज़िल्लत की जंजीरों में बंधा हुआ है। कैसे उस काश्मीर को अल्फाजों में बयां करूं जो की बला बला से भी ज़्यादा खूबसूरत है।

ये कश्मीर जो हसीन है जिसकी वादियों में बस खो जाने को जी चाहता है जी चाहता है कि इसके बर्फ की सफेदी को कुछ इस तरह अपने दामन में लगा लूं कि कोई दाग नजर ना आए।

कैसे बयां करूं उस कश्मीर को जिसके आगे तो शायद जन्नत की अप्सराएं भी फीकी हैं।

ये कश्मीर है जितना सुना, जितना पढ़ा है उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत कहीं ज़्यादा मनमोहक है ये कश्मीर है जो कभी धरती का स्वर्ग बताया जाता था और आज भी है, ये कश्मीर है जो निहायती खूबसूरत था और आज भी है, ये कश्मीर है जो मेरे जज्बातों में है और जिससे मैं लफ़्ज़ों में बयां नहीं कर सकता।।

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