“एक पैगाम देश के नाम”

लिख रही हूँ एक पैगाम,

अपने देश, हिंदुस्तान के नाम।

कौन सिख? कौन ईसाई? कौन है हिंदु और कौन मुसलमान?

हम सब अलग नहीं हैं, हम सबके दिलों में बसता है हिंदुस्तान।

हिंदुस्तान को नुक्सान पहुंचाने वालों, सुनलो ध्यान से खोल के कान,

अगर बुरी नज़र डाली ना इस पे, तो ये तुम भी जानते हो कि अच्छा नहीं होगा परिणाम।

यहाँ के कण-कण में बसते हैं राम,

यहीं पढ़ी जाती है गीता और यहीं पढ़ी जाती है कुरान।

हम सब अलग नहीं हैं,

हम सबके दिलों में बसता है हिंदुस्तान।

लिख रही हूँ एक पैगाम,

अपने देश के जवानों के नाम।

फौज में भर्ती होना, हर किसी के बस का नहीं है काम,

किस्मत वाले होते हैं वो जो करदे अपनी ज़िंदगी अपने देश के नाम।

एक माँ अपने अंतिम समय में अपने लाल को देख तक नहीं पायी,

और एक भाई है, जिसकी इस बार भी सूनी रह गयी कलाई।

इनके बिना खतरे में है हमारे देश की आन,

हमारे जवान हैं हमारे देश का मान।

आओ बढ़ाएँ इनकी शान,

मिलकर करें हम इन्हें सलाम।

लिखा है एक पैगाम,

अपने देश के जवानों और हिंदुस्तान के नाम।

🇮🇳 जय हिंद! 🇮🇳

-निशा जाटव 💙

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