इश्क़ की होली

तुझको नही तुझसे रंगने आऊंगा,
ज़िस्म को नही रूह को रंग जाऊंगा,
मुश्किलात बहुत हैं पर आऊंगा जरूर
नज़रों से छुपाकर नही नज़रो में रंग जाऊंगा ।

तेरी गली में पहरेदार बहुत होंगे,
हमारे किस्से के जानकार बहुत होंगे,
लगा लेने दो उन्हें पाबंदियां जितनी
गालों पर सुर्ख लाल गुलाल बहुत होंगे ।

रंगों को नही दिलों के मैल धोना भी जरूरी हैं,
सड़कों और गलियों को भी रंगों में रंगना जरूरी हैं,
पाबंदियां भी होंगी, पहरेदार भी होंगे
पर महफ़िल में इश्क़ का रंग चढ़ना भी जरूरी हैं ।

©Manthan Prateek

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