अवसाद

हां बहुत अकेली हूं मैं,
और ना ही किसी की सहेली हूं मैं,
कोई गुम सी पहेली हूं मैं,
ना जाने क्यों कोई नहीं देता मेरा साथ,
शायद तभी मुझे घेर रहा है यह अवसाद!

यह अवसाद ,उफ़!  यह अवसाद,
पता नहीं क्यों जिंदगी मे  नहीं आ रहा है,
मुझे  कोई दूसरा ख्याल,
नहीं पता किससे करूं मैं सवाल,
डरती हूं कि कहीं  हो ना जाए कोई बवाल|

खफा हूं मैं ,परेशान हूं मैं,
रोती हूं मैं,डरती हूं मैं,
अंधेरे से, रोशनी से,
परेशान है मेरा मन,
अंदर ही अंदर से खा रहा है मुझे मेरा अकेलापन,

ना जाने क्यों मेरी खुशी  ने ले ली है मुझसे  दूरी,
और  अवसाद बन गया है मेरी मजबूरी,
और  अवसाद बन गया है मेरी मजबूरी||
–  जाह्नवी बत्रा

 

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