अनांग्शा

 

*अनांग्शा*

“उलझी हुई राहों पर अब हम निकल चुके हैं। पीछे मुड़ कर देखते हैं तो याद आती है, वो घर की चौखट; जहाँ अक्सर हम गिर जाया करते थे। माँ दौड़कर आती और हमें गले लगा लेती थी। अपनें पल्लू से हमारी चोट को पोंछती। आज जब आ चुका हूँ, घर की चौखट से दूर, तब से बस याद बहुत आती है।” आज राहुल रोते हुए अनांग्शा से कह रहा था।
अनांग्शा और राहुल दोनों नें प्रेम विवाह कर लिया था। पापा नें उन्हें घर में प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। बस तब से ही दोनों घर से दूर ही रहते थे। अनांग्शा तलाकशुदा होनें के कारण घरवालों नें उसे स्वीकार करने से मना कर दिया था।
अनांग्शा आज फिर राहुल का सिर अपनी गोद में रखकर उसे सुला रही थी। राहुल सो गया था। अनांग्शा सोच रही थी,”उसका खुद का अतीत इतना बुरा रहा है, उसे चौखट से दूर हो जाने पर अच्छा लगता है। जिंदगी भी कैसी है ना, एक इंसान के लिए जो अच्छा है, वही किसी और के लिए वह बुरा भी हो सकता है।”
अनांग्शा एक नाम था खुशी का, जिसनें अपनी परेशानियों से पार पाते हुए राहुल को जीना सिखाया था।
कल वह जायेगी, राहुल के घर की दहलीज पर। “क्या वह फिर से राहुल को उस घर में दाखिल करवा पायेगी?”
ये सवाल अब भी उसके जेहन में चल रहा था।

Krishan Kant Sen

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