अधूरे रह गए हैं

कुछ नज़्म, कुछ नग़्मे,
कुछ तमन्ना, कुछ सपने,
कुछ ख्वाहिश, कुछ इरादे,
अधूरे रह गए हैं।

कुछ बातें, कुछ इरादे,
कुछ जुदाई, कुछ मुलाक़ातें,
कुछ दुआएं, कुछ फरियादें,
अधूरे रह गए हैं ।

कुछ कसमें, कुछ वादे,
कुछ तमन्नाएं, कुछ हसरतें,
कुछ हरकतें, कुछ बरकतें,
अधूरे रह गए हैं।

कुछ छिपाने, कुछ जताने,
कुछ हँसाने, कुछ रुलाने,
कुछ झूठ, कुछ बहाने,
अधूरे रह गए हैं।

एक दौर था जब तुम हमारे थे,
और हम तुम्हारी मोहब्बत के मारे थे,
अब तुमसे मोहब्बत की ख्वाहिशें,
अधूरे रह गए हैं।

आज ग़म में जी रहे हैं,
तुम्हारी बातों को याद कर रहे हैं।
अब भी तुम्हारे कई किस्सो को बताने,
अधूरे रह गए हैं।

करवट बदल के रात गुज़र रही है,
तुम्हारी यादें ज़ेहन में उतर रही है,
पर तुम्हारा ज़ेहन में उतरने की कोशिशें,
अधूरे रह गए हैं।

अधूरे रह गए हैं हम,
अधूरे रह गए हो तुम,
और हमारे इश्क़ के चर्चे भी
अधूरे रह गए हैं।

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