हाँ वो शख्स मेरा पिता कहलाता हैं……

मेरी हर जिद को पूरी करने मे वो अपनी जी जान लगाता हैं
आये आँखो में आसू तो पूरी दुनिया से अकेले ही लड़ जाता हैं
मेरे सपनो को वो अपनी आँखो में सजाता हैं
जब लड़खड़ाये कदम तो मेरा हाथ थामे हुए नजर आता हैं
और मेरी हार में वो सबसे आगे आके मुझे गले लगाता हैं
मेरी हर एक चोट पर वो मलहम बन के लग जाता हैं
दुनिया के सामने एक शख्त दिल इंसान बन जाता हैं
पर अकेले में वो भी आँसू बहाता हैं
अपनी हर एक मन्नत में वो मेरी हर दुआ कुबूल होने की अरदास पढ़ जाता हैं
वो शख्स मुझे पूरे दिलो जान से चाहता हैं
मेरे उससे दूर होने के ख्याल से भी वो सिहर जाया करता हैं
नाराज तो वो भी होता हैं मुझसे
पर अगर कोई और करे मेरे खिलाफ बातें
तो उसे भी उसकी हद याद दिला दिया करता हैं
और अगर दिख जाये उसे ये गली पे मिल जाने वाले आशिक
तो हक से मेरा हाथ पकड़ साथ चल दिया करता हैं
भले ही दिन भर बिजी हो अपने काम में
पर जब थक जाता हैं तो सुकून की तलाश में
वो अक्सर मुझे ढूंढा करता हैं
वो एक शख्स हर वक्त मुझे मेरे पास खड़ा नजर आता हैं
जो लाने को मेरे चेहरे पे मुस्कुराहत
पूरी दुनिया से लड़ जाता है
हाँ वो शख्स मेरा पिता कहलाता हैं
जो मुझे हर दर्द से मुझे बचाता हैं
और मुझे सबसे ज्यादा चाहता हैं
जो बेशर्त मुझे अपने गले से लगाता हैं
हाँ वो शख्स मेरा पिता कहलाता हैं

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