वक़्त

मैं न रुकता किसी के लिए

न कोई अपना न कोई पराया मेरे लिए,

हमेशा चलता रहता हूँ, मैं

शांत रह कर भी बहुत कुछ कहता हूँ मैं

बेश क़ीमती तोहफो में है सबसे पहले मेरा मुक़ाम,

हूँ फ़िर भी हर किसी के पास चाहे कोई खास हो या आम,

जिसने मेरी क़द्र जानी है,

दुनिया उसी को पहचानी है,

जिसने मुझको बेवजह गवाया है,

उसने ख़ुद को जीते जी हराया है।

कुछ अगर बन ना हो तो कुछ हासिल करना हो तो सीखलो मेरा प्रबंध,

ताकि बरकरार रहे  सारे संबंध और मिले सफ़लता का भी आनंद।

-खाँन अतिया रफ़ी

 

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