राजनीति

भाषणों में भूचाल आ गया हैं,
लगता है सियासी माहौल आ गया है ।

गली की नुक्कड़ों से लेकर चौक चौराहों तक राजनीति छा गया हैं,
लगता है चुनाव आ गया है ।

पान के कत्थे से लेकर चाय की चुस्की तक नेताओ के ही घुट लिए जा रहे हैं,
लगता हैं मतदान के दिन नज़दीक आ रहे हैं ।

ईश्वर-अल्लाह सड़कों पर लाये जा रहे हैं,
लगता है अच्छे दिन फिर से आ रहे हैं ।

सहादत पर भी सियासत किया जा रहा हैं,
लगता है लोकतंत्र का महापर्व आ रहा है ।

गड़े मुर्दे फिर से निकले जा रहे हैं,
लगता है लुटेरे फिर से लूटने आ रहे हैं ।
©Manthan Prateek

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