मेरे कलम की स्याही

मेरे कलम की स्याही

किसी साज की तरह है तेरा लडना,
कभी सुर तीखे होते हैं तो कभी भारी।
तु हर रोज नया सा नायाब लगता है,
मेरी कोशिश है कि तुझमें बस जाऊं मैं सारी की सारी।
तेरी बातों का मिजाज थोड़ा खट्टा थोड़ा मिठा है,
शरारतें कूट कूट कर भरी हो जैसे तुझमें सारी।
मेरे हर मर्ज की तु मुझे दवा लगता है,
तुझे देखते ही दूर हो जाए हर बिमारी।
शोर तेरे प्यार का अब भाने लगा है मेरे दिल को,
ना जाने कब से सुनसान पडी थी जिंदगी तुने करदी अब हरी भरी।
तेरे लिए संवरना मुझे अच्छा लगने लगा है,
जबसे तुमने कहा कि काली बिंदी में तुम लगती हो बहुत प्यारी।
तुझे मेरा अपना कहना मुझे तेरा ओर बनाता है,
तू ने कब्जा ली मेरे दिल की ज़मीन सारी।
मेरी कलम की तु स्याही हो गया है सनम,
अब क्या जिंदगी लेकर रहोगे हमारी।

-प्रियंका सिरसवाल


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