मेरी कलम आजाद है

मेरी कलम आजाद है
आजाद इन तुगलकी फरमान से
सत्ता के ठेकेदारों से
राजनीति के गलियारों से
महकूम के हवालों से
नेता के सवालों से
गुलामी के ख्यालों से
आज़ाद, चटपटी बातों से
मुझे रोकती आवाजों से
खिलाफ मेरे हथियारों से
ईमान बेचे हुए मक्कारों से
मुश्किल की मझदारों से
आज़ाद बंदिश की दीवारों से
आरोप की तलवारों से
ऊपर बैठे हुक्मरानों से
दौलत के भूखे रिवाजों से
यह इंकलाब की आवाज है
मेरी कलम आज़ाद है।

-अवि

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