बलात्कार

कहते हैं उन्हें खुदा का नूर , फिर क्यों तड़पती है  वो बेकसूर ,
क्यों मां तुमने मुझे इस दुनिया  से लड़ना नहीं  सिखाया?
तड़पती रही मैं चिल्लाती रही रोती रही  फिर भी मेरी सिसकियां किसी ने नहीं सुनी,
क्यों मां क्यों तूने मुझे इस जालिम दुनिया का यह राज नहीं बताया?
मां  तू जब पूजा करती थी तो कहती थी कि यह फरिश्ता मुझे  बचाएगा ,पर मां आज तो वह फरिश्ता भी ना आया,
मां क्यों होता है रोज-रोज लड़कियों पर  अत्याचार, क्यों नहीं तुम्हारा फरिश्ता  करता  कोई चमत्कार?
क्यों मुझे जन्म लेने से पहले  कोख में ही मार दिया जाता है?
मां ऐसा क्यों है यह संसार?
जो छीन लेता है मेरा जीने का अधिकार,
देता है जो दर्द ,क्या वही होता है मर्द?
करके मेरा अपमान क्या कहला पाएगा वह इंसान?
पिंजरे से निकालो परिंदों को,  कैद में रखो इन दरिंदों को|
सजा दो इन्हें इस कदर, किसी से भी ना मिला  पाए यह  नजर||
-जाह्नवी बत्रा

 

Spread the love