नींद को त्याग कर

नींद को त्याग कर चल कुछ सपने साकार कर,

ख़ुदा पर और ख़ुद पर भरोसा करना है तभी तो स्वाद सफलता का चखना है,

समय न तू अब बर्बाद कर चल उठ और अपना काम कर।

सूर्य की तरह चमको तुम चलों उठो न बैठो न यूँ गुमसुम,।

अलग बनो दूसरो के लिए अलख बनो।

सफ़लता का एक और राज़ बताऊँ,?

थोड़े तुमको गुण सिखाऊ?

थोड़ी माँ बाप और गुरुओ की सेवा करलो ज़रा अपनी झोली उनकी दुआओ से भर लो।

-खाँन अतिया रफ़ी

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