नारी शक्ति का परचम लहराकर उमा जी बनी लोगों के लिए प्रेरणा।

*कहते है कि – संघर्ष इतना कठिन करो कि सफलता शोर मचा दे।*

हम सब के जीवन में सुख और दुःख दोनों आते रहते है हम लोगों को अपने जीवन में कभी भी घबराना नहीं चाहिए और हमेशा हिम्मत से काम लेना चाहिए *जैसे उमा जी ने लिया।*

मेहनत की मिसाल बेबाक महिला जो अपने हालातों से थी अनजान,बहुत छोटी सी उम्र में उन्होंने देश प्रेम का सपना देखा।

पर हालातों ने उन्हें कहां लाकर खड़ा कर दिया।

हम बात कर रहे हैं- *श्रीरामपुर में रहने वाली उमा पांडेय जी के बारे में।*

नारी शक्ति का परचम लहरा के उन्होंने यह साबित किया कि समाज के सुधार के लिए वो हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट करेगी।

हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट करके उन्होंने कई गरीब मरीजों की मदद की।

और यही नहीं जैसा की सब कहते है कि ईश्वर भी उनकी मदद तभी करता है जब वो स्वयं की मदद खुद करता है या करने की ठान लिया है। और इस मुश्किल घड़ी में उनके हर मंजिल पर उनके जीवन साथी यानी (डॉक्टर देव प्रकाश पांडे जी )ने उनका साथ दिया और एक अच्छे पति होने का फर्ज निभाया। ससुराल में घूंघट डाल के रहने वाली उम्र जी ने घुंघट की प्रथा को हटाकर उन्होंने यह साबित किया कि *संस्कार आंखों और परवरिश में होना चाहिए ना कि घुंघट में।

उनका मानना है कि इंसान पैसों से नहीं बल्कि अपने सोच से महान बनता है और सोच से अमीर बनता है। उनके मां-बाप ने उनका हमेशा साथ दिया और उन्हें यही सीख दिया कि समाज की सेवा करें और रक्षा करें जो कि वह आज भी करती आ रही है।

उनका मानना यह है की शादी होने के बाद जिंदगी और सपने नहीं बदलते,अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो। और उन्होंने इस बात को बखूबी साबित भी किया।

करोना काल में भी गरीबों की मदद के लिए उमा जी हमेशा आगे रही। खुद के पैसों से उन्होंने गरीबों को खाना खिलाया,उनका साथ दिया और उनके साथ हर मुसीबत में खड़ी रही। यहीं नहीं इसके साथ ही साथ वो अनाथ आश्रम और ओल्ड एज होम में अपना योगदान देती आई ।

उनका मानना यह है- *कि लोगो की मदद कर के और अच्छे काम करके उनके अंदर एक आत्मविश्वास पैदा होता है।*

 

उनका मानना यह भी है की कमजोरी उस इंसान के अंदर रहता है, जिस इंसान के अंदर आत्म विश्वास नहीं होता।

उनकी कोई कमजोरी नहीं है, लेकिन उनकी ताकत उनके पति और उनके दो बच्चे हैं जिससे उन्हें हिम्मत मिलती है।उमा जी की आंखों में देश सेवा के प्रति प्रेम देख कर उनके बच्चे भी इसमें उनका साथ देते हैं और हिम्मत देते हैं।

हमारे समाज में उमा जी जैसे महिलाओं की सख़्त जरूरत है। वह कई महिलाओं के लिए मिसाल है कि शादी के बाद जिंदगी रूकती नहीं और ना ही बदल जाती है।एक नारी किसी भी समय, कही भी, कोई भी स्थिति का सामना बहादुरी से कर सकती है।

अगर आपके अंदर देश प्रेम हैं, समाज को बेहतर सीख देने की क्षमता है तो आपको दुनिया की कितनी बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी आपके हौसलें को कमजोर नही होने देगी।

लेखक( स्वाति पांडे)

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