धरती

*धरती*

आओ जादू दिखाये,
एक जादू जो धरती करती जा रही है,
आज से नहीं यह बरसों से चला आ रहा है।
छुपा हुआ है कोई राज इसमें,
सदियों से यह छिपा हुआ ही रहा है।
वो देखों वहाँ कुछ बच्चे खेल रहे हैं।
सुन्दर सी धरा को अपनें मुख से चूम रहे हैं।
कुछ हिस्सों में हरियाली अभी भी नजर आती है।
पर कुछ हिस्सों को देख दिल घबराता जाता है।
वो देखो वहाँ बना है एक परमाणु बिजलीघर।
वो खतरा बना है धरती का धरती पर।
प्यारी सी रचना है धरती पर इंसान,
तोड़ कर हदें देखों बन रहा है हैवान।
अब इसकी हैवानियत बढ़ती जा रही है।
धरती ही नहीं, आकाशगंगा भी इससे थरथरा रही है।
ध्यान से देखो, रोती हुई धरती नजर आ रही है।
कुछ कसक है दिल में उसके, शायद कुछ छुपा रही है।
घाव इतनें हो गये हैं उस पर, शायद वो अब बोल भी नहीं पा रही है।

Krishan Kant Sen
@krishankant.sen.Jr

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