तस्वीर

आज तुम्हारी तस्वीर देखी
मेरे बटुए में मिली
मुझे वो दिन याद आ गया
जब तुम पहली दफा दिखी
एक मुस्कुराहट थी तुम्हारे होंठों पर
और मैं थोड़ा परेशान था
तुम कुछ पल में करीब थी मेरे
और मैं बेहद हैरान था
तुमने हाथ बढ़ा के अपनी तारीफ दी
और मैं नाम मे खो गया
तुमने मुस्कुरा मेरा नाम और परेशानी पूछी
मैं उस ही पल तुम्हारा हो गया
क्या जाम, शराब या अफीम का नशा होगा
जो नशा तुम्हारी आँखों मे था
मीर या ग़ालिब की शायरी भी फीकी
जो मज़ा तुम्हारे अल्फ़ाज़ों में था
अब मेरी सारी चिंता छू हो गयी थी
और मैं कायल तुम्हारी बातों का था
मुझे क्या परवाह थी अपनी अब तो
मैं मसरूफ़ तुम्हारे ज़ुल्फ़ों में था
ज़रा धुंधली यादों को और साफ करता हूँ
काँधे पर सिर रखना याद आता है मुझे
मेरी बाहों में खुद महफूज़ समझती थी
और मेरे गालों से खेलना याद आता मुझे
तुम्हारा उस रात सर्द हवाओं में छत पर बैठना
और चाय की चुस्की के साथ मेरे करीब आना
आने से याद आया तुम्हारी चिट्ठी नही आई अब तक
हम इंतज़ार में बैठे रहे बीत गया ज़माना
अभी भी मोहब्बत है हमसे या रह जाएं तस्वीर के सहारे
जो आज हमे बटुए में मिली
हम हारे तुम्हारी मोहब्बत में या तुम्हारी चाहत में
जो शायद हमारे किस्मत में न हो लिखी।

-अवि

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