“खबर”

खबर लेनी हो खुद की
तो दो पल चैन से बैठ जाना
दिल हो कुछ साझा करने का तो चुप चाप शीशे को देख आँखो को पढ़ जाना
लड़खड़ा रहे हैं कदम तो हाथो थाम खुद ही सभल जाना
यकीन मानो कोई नहीं यहाँ किसी का
तुम हो और तुम अपने रह जाना

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