कितना मुश्किल है मर कर जो जी जाए।

कितना मुश्किल है मर कर जो जी जाए।

जब आँखों से आंसुओं की धारा यूं ही बह जाए।

मन की पीड़ा किसी से बोलना चाहे पर बोल ही ना पाए।

कलम उठाए और दिल के जज्बात अगर लिख ही ना पाए।

कहने को हो हजारों शब्द पर बात जब जुबां से निकल ही ना पाए।

अपनों से लड़कर खुद ही टूट जाए।

  • कितना मुश्किल है मर कर जो जी जाए।
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