आज कुछ बातें की जाए।

बातें बहुत हैं
कहने को लोग भी बहुत हैं
पर शायद मैं ही कुछ कम सी पड़ गई।

रातें बहुत है
उनमें सितारें भी बहुत हैं
पर शायद मैं ही कुछ नम सी पड़ गई।

इस कोहरे से भरी जिंदगी में

एक खुला आसमान चाहिए,

इस भीड़ से भरी कश्ती मे

अपनी एक पहचान चाहिए।

_निकिता लाहोटी

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